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01-01-1970 Blog

देव गुरु बृहस्‍पति के कारण आती हैं नौकरी और शादी में रुकावटों, इन उपाय से होगा लाभ-

देव गुरु बृहस्‍पति के कारण आती हैं नौकरी और शादी में रुकावटों, इन उपाय से होगा लाभ-- प्रिय पाठकों/मित्रों, हिन्दू धर्मशास्त्रों और ज्योतिष ग्रंथों में गुरु यानी बृहस्पति को शुभ देवता और ग्रह माना गया है। इसके शुभ प्रभाव से जहां एक ओर लंबी उम्र, मनचाही नौकरी और धन के साथ पिता का प्रेम और धर्म लाभ मिलता है। वहीं कन्या के जीवनसाथी का निर्णय करने वाला भी देवगुरु बृहस्पति ही माने गए है। पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार शुभ ग्रह होने के बावजूद हमेशा गुरु शुभ फल नहीं देता। बल्कि अशुभ ग्रहों के प्रभाव में आने पर उसके बुरे प्रभाव से रोग, नौकरी या कारोबार में परेशानी, माता-पिता से विवाद और कन्या के विवाह में दिक्कतें पैदा होती है। इसलिए गुरु दोष के बुरे असर से बचने के लिए कुछ धार्मिक उपाय बताए गए हैं। इनसे गुरु को अनुकूल बनाया जा सकता है। कई बार मेहनत करने के बाद भी नौकरी या मनचाहा फल नहीं मिल पाता है। इसका कारण आपकी कुंडली में बृहस्‍पति का अशुभ प्रभाव हो सकता है। कई बार किसी अशुभ या क्रूर ग्रह की वजह से आपको अपने किसी भी काम में जी तोड़ मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती है। मेहनत तो हर कोई करता है लेकिन मेहनत का फल बहुत कम लोगों को मिलता है। किसी को प्रयास करने के बाद भी अच्‍छी नौकरी नहीं मिलती है या घर में धन की कमी हमेशा रहती है या आपकी शादी में रुकावट आ रही है या कोई भी समस्‍या है तो इसका कारण आपकी कुंडली में बैठा बृहस्‍पति हो सकता है। ========================================================================= बृ‍हस्‍पति होता है कारण, विवाह विलम्ब/देरी का --- जी हां, ये सच बात है कि कुंडली में अगर बृहस्‍पति देव अशुभ प्रभाव दे रहे हैं तो आपके हर काम में रुकावट आती है। इन सभी के अलावा महादशा भी विवाह की घटना तय करने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक निभाता है। दशा पैटर्न में बृहस्पति की किसी भी भूमिका को (महा दशा प्रभु, अंतर दशा प्रभु या प्रत्यन्तर दशा भगवान के रूप में) विवाह को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। सप्तम प्रभु की भूमिका भी विवाह को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। राहु महादशा भी विवाह की घटना तय करने में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक निभाता है। दशा पैटर्न में बृहस्पति की किसी भी भूमिका को (महा दशा प्रभु, अंतर दशा प्रभु या प्रत्यन्तर दशा भगवान के रूप में) विवाह को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। सप्तम प्रभु की भूमिका भी विवाह को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। राहु हस्तक्षेप भी विवाह के लिए कारक माना जाता है। शुक्र गृह शादी का मुख्य कारक है और यह भी विवाह को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की विवाह वह समय है ,जब दो अपरिचित युगल दाम्पत्य सूत्र में बंधकर एक नए जीवन का प्रारंभ करते है ,,ज्योतिष में योग ,दशा और गोचरीय ग्रह स्थिति के आधार पर विवाह समय का निर्धारण होता है ,परन्तु कभी-कभी विवाह के योग ,दशा और अनुकूल गोचरीय परिभ्रमण के द्वारा विवाह काल का निश्चय करने पर भी विवाह नहीं होता क्योकि जातक की कुंडली में विवाह में बाधक या विलम्ब कारक योग होते है |विवाह के लिए पंचम ,सप्तम ,द्वितीय और द्वादश भावों का विचार किया जाता है ,द्वितीय भाव सप्तम से अष्टम होने के कारण विवाह के आरम्भ व् अंत का ज्ञान कराता है ,साथ ही कुटुंब कभी भाव होता है ,द्वादश भाव शैया सुख के लिए विचारणीय होता है |स्त्रियों के संदर्भ में सौभाग्य ज्ञान अष्टम से देखा जाता है अतः यह भी विचारणीय है |शुक्र को पुरुष के लिए और स्त्री के लिए गुरु को विवाह का कारक माना जाता है |प्रश्न मार्ग में स्त्रियों के विवाह का कारक ग्रह शनि होता है |सप्तमेश की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है अगर आपकी कुंडली मे गुरु दोष है तो उसकी शांति के उपाय कर के आप उसको अनुकूल कर सकते हैं और इन उपायों के बाद आपके सभी काम बनने लगेंगें। गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इनकी कृपा से धन-समृद्धि, पुत्र और शिक्षा की प्राप्ति होती है। पीला रंग और पीली वस्तुएं इनको बहुत प्रिय हैं। बृहस्पतिवार के दिन पीले वस्त्र पहनने, पीली वस्तुओं का दान करने और घर पर पीले पकवान बनाने से यह बहुत प्रसन्न होते हैं। बृहस्पतिवार के दिन इनका उपवास रखने अौर पीले वस्त्र पहनकर, केले के वृक्ष को पीले रंग की वस्तुएं अर्पित करके पूजन करनी चाहिए। उसके उपरांत कथा सुननी अौर आरती करें। देवगुरु की पूजा से व्यक्ति के अंदर आध्यात्मिक भावना पैदा होती है। ======================================================================= जानिए देव गुरु बृहस्‍पति को शांत करने के उपाय ---- ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार बृहस्पति के उपाय हेतु जिन वस्तुओं का दान करना चाहिए उनमें चीनी, केला, पीला वस्त्र, केशर, नमक, मिठाईयां, हल्दी, पीला फूल और भोजन उत्तम कहा गया है. इस ग्रह की शांति के लए बृहस्पति से सम्बन्धित रत्न का दान करना भी श्रेष्ठ होता है. दान करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए कि दिन बृहस्पतिवार हो और सुबह का समय हो. दान किसी ब्राह्मण, गुरू अथवा पुरोहित को देना विशेष फलदायक होता है. बृहस्पतिवार के दिन व्रत रखना चाहिए. कमज़ोर बृहस्पति वाले व्यक्तियों को केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पंक्षियों विशेषकर कौओं को देना चाहिए. ब्राह्मणों एवं गरीबों को दही चावल खिलाना चाहिए. रविवार और बृहस्पतिवार को छोड़कर अन्य सभी दिन पीपल के जड़ को जल से सिंचना चाहिए. गुरू, पुरोहित और शिक्षकों में बृहस्पति का निवास होता है अत: इनकी सेवा से भी बृहस्पति के दुष्प्रभाव में कमी आती है. केला का सेवन और सोने वाले कमड़े में केला रखने से बृहस्पति से पीड़ित व्यक्तियों की कठिनाई बढ़ जाती है अत: इनसे बचना चाहिए। ---गुरुवार के दिन गुरु बृहस्‍पति की मूर्ति या बृहस्‍पति जी के फोटो को पीले रंग के कपड़े पर स्‍थापित करें और उसकी पूजा करें। अपनी पूजा की थाल में पीले चावल, केसरिया चंदन, पीले फूल और प्रसाद में चाहें तो चने की दाल या गुड का प्रयोग करें। ----दूसरा उपाय है कि गुरुवार के दिन बृहस्‍पति देव को प्रसन्‍न करने के लिए पीले रंग की वस्तु का दान करें। किसी गरीब व्यक्ति को या मन्दिर में जाकर दान करें। ---तीसरा उपाय है कि सूर्योदय होने से पहले उठें और भगवान विष्णु जी के सामने घी का दीया जलाएं और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। ---गुरुवार के दिन नहाते समय एक चुटकी हल्दी को पानी में डालकर नहाएं और इसके बाद ॐ नम: भगवते वासुदेवाय का जाप करते हुए केसर का तिलक लगाएं। --- अनिद्रा से परेशान व्यक्ति 11 बृहस्पतिवार तक केवांच की जड़ का लेप माथे पर लगाएं। -- - स्त्रियां गुरुवार को हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है। --- - बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार के दिन गाय का घी, शहद, हल्दी, पीले कपड़े, किताबें, गरीब कन्याओं को भोजन का दान अौर गुरुओं की सेवा करें। --- - गुरुवार के दिन केले का दान शुभ होता है। ---- - गुरु के अशुभ प्रभाव को कम करने अौर सभी कष्टों से छुटकारा पाने के लिए गुरुवार के दिन चमेली के फूल, गूलर, दमयंती, मुलहठी और पानी में शहद डालकर स्नान करें। -- विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए गुरुवार का व्रत अौर देवगुरु बृहस्पति के सामने गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। - गुरुवार के दिन बृहस्पति देव को पीले पुष्पों का अर्पण करके पीले चावल, पीला चंदन, पीली मिठाई, गुड़, मक्के का आटा, चना दाल आदि का भोग लगाते हैं। माथे पर हल्दी का तिलक लगाने के पश्चात हल्दी गांठ की माला से इस मंत्र के जाप करना शुभ होता है। "ॐ ऐं क्लीं बृहस्पतये नमः। --गुरुवार के दिन व्रत रखें और पीले रंग के कपड़े पहनें। यह भी कोशिश करें कि बिना नमक का भोजन हो और पीले रंग का पकवान शामिल हो। ---अगर आपकी शादी में रुकावट आ रही है या किसी ना किसी वजह से आपकी शादी में समस्‍याएं आ रही हैं तो गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोड़ी हल्दी लगाकर खिलाएं। ---गुरुवार के दिन केले के पेड़ के नीचे शाम के समय घी का दीपक जलाएं। ---ऐसे व्यक्ति को मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर निःशुल्क सेवा करनी चाहिए। ----किसी भी मन्दिर या इबादत घर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से झुकाना चाहिए। ---- ऐसे व्यक्ति को परस्त्री / परपुरुष से संबंध नहीं रखने चाहिए। ---- गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख गौघृत का दीपक जलाना चाहिए। -----गुरुवार के दिन आटे के लोयी में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए। ----गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु गुरुवार का दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व-भाद्रपद) तथा गुरु की होरा में अधिक शुभ होते हैं। -----ऐसे व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए तथा महत्त्वपूर्ण समयों पर इनका चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिए। किसी भी जानकारी के लिए Call करें : ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री--9039390067 ===================================================================== जानिए क्यों नहीं मिलती नौकरी /रोजगार--- आज के समय में हमारे देश के युवा शिक्षित होने के बाद भी बेरोजगारी की समस्या से झूझ रहे है | समय पर युवाओं को नौकरी न मिलने पर परिवार का आर्थिक संतुलन तो बिगड़ता ही है साथ में बेरोजगार व्यक्ति मानसिक रूप से विकृत भी होने लगता है | कभी-कभी समय पर नौकरी न मिलने पर व्यक्ति गलत रास्ते को अपना लेता है और समस्या और गंभीर होने लगती है | आज के इस लेख में ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री, आपको नौकरी प्राप्ति के ऐसे 10 अचूक उपाय बताने वाले है जिनका प्रयोग आपकी नौकरी में आने वाली सभी अडचनों को दूर करने में आपके लिए सहायक सिद्ध हो सकता है | =============================================================================== ये होते हैं समय पर नौकरी न मिलने के कारण : – इस बात से तो सभी परिचित है की शिक्षित और योग्य युवाओं को समय पर नौकरी न मिलने का मुख्य कारण क्या है | जी हाँ, हमारे देश में निम्न स्तर से लेकर उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार इसका मुख्य कारण है | किन्तु यहाँ हम नौकरी न मिलने के राजनैतिक विषय पर चर्चा न करके अलग विषय पर चर्चा करेंगे | कुंडली दोष :- ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की किसी व्यक्ति के समय पर नौकरी न मिलने का मुख्य कारण उसकी कुंडली में होने दोष हो सकते है | कुंडली दोष में मुख्यतः काल सर्प दोष , मांगलिक दोष और नक्षत्र दोष आपकी नौकरी में अड़चन के कारण बन सकते है | इसलिए किसी योग्य पंडित से अपनी कुंडली दिखाए और इन दोषों का समय पर निवारण कराएँ | आपकी नौकरी में आने वाली अड़चने अपने आप दूर होने लगेगी | गृह दोष : वर्तमान समय में आपकी कुंडली में ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव आपकी नौकरी में अड़चन के कारण बन सकते है | जैसे शनि दोष , राहू दोष या मंगल दोष आदि | कुंडली में गृह दोष होने पर समय पर इनके निवारण हेतु उपाय जरुर करें | ====================================================================== अपनाएं नौकरी पाने के लिए इन 10 अचूक उपाय को --- ---आज से ही शनिदेव की आराधना करना शुरू कर दे | आप प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर जाकर शनिदेव को सरसों तेल व काले तिल अर्पित करें व "ॐ शं शनैश्चराय नम:" मंत्र के यथासंभव जप करें | ----सात तरह के अनाज मिलाकर अपने ऊपर से सात बार वार ले व थोडा-थोडा करके सुबह-सुबह पक्षियों को खिलाना शुरू कर दे | इससे गृह दोष शांत होते है | ----अपने पूजा स्थान पर उड़ते हुए हनुमान जी की फोटो लगाये व उनकी आराधना करें | आपके नौकरी के द्वार शीघ्र ही खुलने लगेंगे | ---पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने से सभी देवता व अपने पित्र देव प्रसन्न होते है | इसलिए रोजाना पीपल के पेड़ में जल चढ़ाये और शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाये और अपने पित्र देव को याद करें | ----किसी भी दिन पानी वाले कुँए में थोडा दूध डाले और इस बारे में किसी को भी न बताये | नौकरी पाने का यह एक कारगर टोटका है | ---प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिर जाये व शिवलिंग पर दूध और पानी चढ़ाये, साथ में थोड़े चावल व मीठा भी अर्पित करें | इस प्रकार करने के पश्चात् 2 मिनट हाथ जोड़कर बैठ जाये व भोलेनाथ से अपनी नौकरी की अरदास लगाये | भोलेनाथ जी की कृपा से आपकी नौकरी में आने वाली सभी अडचने दूर होने लगेंगी | ----प्रत्येक माह के पहले सोमवार को एक सफेद कपडे में थोड़े काले चावल बांधकर माँ काली के मंदिर में जाकर उनके चरणों में चढ़ाये | इस प्रयोग से भी नौकरी मिलने के द्वार खुलने लगते है | -----नौकरी के लिए इंटरव्यू पर जाते समय के निम्बू में 4 लोंग को फिट कर हनुमान के इस मंत्र " ॐ हनुमते नमः " का 108 बार जप करें | अब इस निम्बू को अपने बैग में रखकर इंटरव्यू के लिए जाए | इस प्रयोग के करने से आपको अवश्य ही इंटरव्यू में सफलता मिलेगी | ----एक नीम्बू को चार भागों में काटकर शाम के समय किसी सुनसान चौराहे पर जाकर चारों दिशाओं में एक -एक करके फेंक दे और बिना मुड़े वापिस घर आ जाए | इस प्रयोग को आप महीने के शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन शुरू करके लगातार 7 दिनों तक करें | यह एक परीक्षित टोटका है | इस टोटके के करने से नौकरी में आने सभी अड़चने दूर होने लगती है और व्यापार में वृद्धि भी होने लगती है | -----41 दिनों तक हनुमान जी के मंदिर में जाकर दीपक जलाये | और पहले दिन दीपक जलाने के साथ ही हनुमान जी से अपनी नौकरी की अरदास लगाये | यदि संभव हो सके तो प्रतिदिन हनुमान जी के चरणों से सिन्दूर लेकर अपने माथे पर तिलक भी करें | विशेष ध्यान रखें---ऊपर दिए गये नौकरी पाने के सभी अचूक उपाय आपकी नौकरी मिलने में आने वाली सभी अड़चनों को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकते है | किन्तु इन उपायों के भरोसे रहकर प्रयास करना बंद न करें | बार-बार असफलता किसी भी व्यक्ति को अंदर से तोड़ सकती है किन्तु हताश होकर प्रयास बंद कर देने से उपरोक्त दिए गये सभी टोटके भी आपके लिए व्यर्थ सिद्ध हो सकते है | ============================================================ ====दाम्पत्य/वैवाहिक सुख के उपाय—- ----यदि जन्म कुण्डली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, द्वादश स्थान स्थित मंगल होने से जातक को मंगली योग होता है इस योग के होने से जातक के विवाह में विलम्ब, विवाहोपरान्त पति-पत्नी में कलह, पति या पत्नी के स्वास्थ्य में क्षीणता, तलाक एवं क्रूर मंगली होने पर जीवन साथी की मृत्यु तक हो सकती है। अतः जातक मंगल व्रत। मंगल मंत्र का जप, घट विवाह आदि करें। ---ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार कुंडली में कुछ विशेष ग्रह दोषों के प्रभाव से वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में उन ग्रहों के उचित ज्योतिषीय उपचार के साथ ही मां पार्वती को प्रतिदिन सिंदूर अर्पित करना चाहिए। सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। जो भी व्यक्ति नियमित रूप से देवी मां की पूजा करता है उसके जीवन में कभी भी पारिवारिक क्लेश, झगड़े, मानसिक तनाव की स्थिति निर्मित नहीं होती है। --- सप्तम भाव गत शनि स्थित होने से विवाह बाधक होते है। अतः "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मन्त्र का जप ७६००० एवं ७६०० हवन शमी की लकड़ी, घृत, मधु एवं मिश्री से करवा दें। -----राहु या केतु होने से विवाह में बाधा या विवाहोपरान्त कलह होता है। यदि राहु के सप्तम स्थान में हो, तो राहु मन्त्र "ॐ रां राहवे नमः" का ७२००० जप तथा दूर्वा, घृत, मधु व मिश्री से दशांश हवन करवा दें। केतु स्थित हो, तो केतु मन्त्र "ॐ कें केतवे नमः" का २८००० जप तथा कुश, घृत, मधु व मिश्री से दशांश हवन करवा दें। -----सप्तम भावगत सूर्य स्थित होने से पति-पत्नी में अलगाव एवं तलाक पैदा करता है। अतः जातक आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ रविवार से प्रारम्भ करके प्रत्येक दिन करे तथा रविवार कप नमक रहित भोजन करें। सूर्य को प्रतिदिन जल में लाल चन्दन, लाल फूल, अक्षत मिलाकर तीन बार अर्ध्य दें। ----जिस जातक को किसी भी कारणवश विवाह में विलम्ब हो रहा हो, तो नवरात्री में प्रतिपदा से लेकर नवमी तक ४४००० जप निम्न मन्त्र का दुर्गा जी की मूर्ति या चित्र के सम्मुख करें। "ॐ पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम्।।" -----ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की यदि किसी स्त्री जातिका को अगर किसी कारणवश विवाह में विलम्ब हो रहा हो, तो श्रावण कृष्ण सोमवार से या नवरात्री में गौरी-पूजन करके निम्न मन्त्र का २१००० जप करना चाहिए- "हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरु कल्याणी कान्त कान्तां सुदुर्लभाम।।" ----किसी लड़की के विवाह मे विलम्ब होता है तो नवरात्री के प्रथम दिन शुद्ध प्रतिष्ठित कात्यायनि यन्त्र एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर स्थापित करें एवं यन्त्र का पंचोपचार से पूजन करके निम्न मन्त्र का २१००० जइ लड़की स्वयं या किसी सुयोग्य पंडित से करवा सकते हैं। "कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोप सुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः।।" -----ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार यदि जन्म कुण्डली में सूर्य, शनि, मंगल, राहु एवं केतु आदि पाप ग्रहों के कारण विवाह में विलम्ब हो रहा हो, तो गौरी-शंकर रुद्राक्ष शुद्ध एवं प्राण-प्रतिष्ठित करवा कर निम्न मन्त्र का १००८ बार जप करके पीले धागे के साथ धारण करना चाहिए। गौरी-शंकर रुद्राक्ष सिर्फ जल्द विवाह ही नहीं करता बल्कि विवाहोपरान्त पति-पत्नी के बीच सुखमय स्थिति भी प्रदान करता है। "ॐ सुभगामै च विद्महे काममालायै धीमहि तन्नो गौरी प्रचोदयात्।।" ----"ॐ गौरी आवे शिव जी व्याहवे (अपना नाम) को विवाह तुरन्त सिद्ध करे, देर न करै, देर होय तो शिव जी का त्रिशूल पड़े। गुरु गोरखनाथ की दुहाई।।" उक्त मन्त्र की ११ दिन तक लगातार १ माला रोज जप करें। दीपक और धूप जलाकर ११वें दिन एक मिट्टी के कुल्हड़ का मुंह लाल कपड़े में बांध दें। उस कुल्हड़ पर बाहर की तरफ ७ रोली की बिंदी बनाकर अपने आगे रखें और ऊपर दिये गये मन्त्र की ५ माला जप करें। चुपचाप कुल्हड़ को रात के समय किसी चौराहे पर रख आवें। पीछे मुड़कर न देखें। सारी रुकावट दूर होकर शीघ्र विवाह हो जाता है। ---जिस लड़की के विवाह में बाधा हो उसे मकान के वायव्य दिशा में सोना चाहिए। ----लड़की के पिता जब जब लड़के वाले के यहाँ विवाह वार्ता के लिए जायें तो लड़की अपनी चोटी खुली रखे। जब तक पिता लौटकर घर न आ जाए तब तक चोटी नहीं बाँधनी चाहिए। ----लड़की गुरुवार को अपने तकिए के नीचे हल्दी की गांठ पीले वस्त्र में लपेट कर रखे। ---पीपल की जड़ में लगातार १३ दिन लड़की या लड़का जल चढ़ाए तो शादी की रुकावट दूर हो जाती है। ---विवाह में अप्रत्याशित विलम्ब हो और जातिकाएँ अपने अहं के कारण अनेल युवकों की स्वीकृति के बाद भी उन्हें अस्वीकार करती रहें तो उसे निम्न मन्त्र का १०८ बार जप प्रत्येक दिन किसी शुभ मुहूर्त्त से प्रारम्भ करके करना चाहिए--- "सिन्दूरपत्रं रजिकामदेहं दिव्ताम्बरं सिन्धुसमोहितांगम् सान्ध्यारुणं धनुः पंकजपुष्पबाणं पंचायुधं भुवन मोहन मोक्षणार्थम क्लैं मन्यथाम। महाविष्णुस्वरुपाय महाविष्णु पुत्राय महापुरुषाय पतिसुखं मे शीघ्रं देहि देहि।।" ----ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने बताया की किसी भी लड़के या लड़की को विवाह में बाधा आ रही हो यो विघ्नकर्ता गणेशजी की उपासना किसी भी चतुर्थी से प्रारम्भ करके अगले चतुर्थी तक एक मास करना चाहिए। इसके लिए स्फटिक, पारद या पीतल से बने गणेशजी की मूर्ति प्राण-प्रतिष्टित, कांसा की थाली में पश्चिमाभिमुख स्थापित करके स्वयं पूर्व की ओर मुँह करके जल, चन्दन, अक्षत, फूल, दूर्वा, धूप, दीप, नैवेद्य से पूजा करके १०८ बार "ॐ गं गणेशाय नमः" मन्त्र पढ़ते हुए गणेश जी पर १०८ दूर्वा चढ़ायें एवं नैवेद्य में मोतीचूर के दो लड्डू चढ़ायें। पूजा के बाद लड्डू बच्चों में बांट दें। यह प्रयोग एक मास करना चाहिए। गणेशजी पर चढ़ये गये दूर्वा लड़की के पिता अपने जेब में दायीं तरफ लेकर लड़के के यहाँ विवाह वार्ता के लिए जायें। ---- तुलसी के पौधे की १२ परिक्रमायें तथा अनन्तर दाहिने हाथ से दुग्ध और बायें हाथ से जलधारा तथा सूर्य को बारह बार इस मन्त्र से अर्ध्य दें---- "ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्त्र किरणाय मम वांछित देहि-देहि स्वाहा।" फिर इस मन्त्र का १०८ बार जप करें- "ॐ देवेन्द्राणि नमस्तुभ्यं देवेन्द्र प्रिय यामिनि। विवाहं भाग्यमारोग्यं शीघ्रलाभं च देहि मे।" ----गुरुवार का व्रत करें एवं बृहस्पति मन्त्र के पाठ की एक माला आवृत्ति केला के पेड़ के नीचे बैठकर करें। -----कन्या का विवाह हो चुका हो और वह विदा हो रही हो तो एक लोटे में गंगाजल, थोड़ी-सी हल्दी, एक सिक्का डाल कर लड़की के सिर के ऊपर ७ बार घुमाकर उसके आगे फेंक दें। उसका वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा। -----जो माता-पिता यह सोचते हैं कि उनकी पुत्रवधु सुन्दर, सुशील एवं होशियार हो तो उसके लिए वीरवार एवं रविवार के दिन अपने पुत्र के नाखून काटकर रसोई की आग में जला दें। -----विवाह में बाधाएँ आ रही हो तो गुरुवार से प्रारम्भ कर २१ दिन तक प्रतिदिन निम्न मन्त्र का जप १०८ बार करें- "मरवानो हाथी जर्द अम्बारी। उस पर बैठी कमाल खां की सवारी। कमाल खां मुगल पठान। बैठ चबूतरे पढ़े कुरान। हजार काम दुनिया का करे एक काम मेरा कर। न करे तो तीन लाख पैंतीस हजार पैगम्बरों की दुहाई।"

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